Diwali Celebration Date 2024: तारीख और लक्ष्मी पूजन मुहूर्त से जुड़े सामान्य प्रश्न
प्र1: दिवाली 2024 में कब मनाई जाएगी – 31 अक्तूबर या 01 नवंबर?
उ: दिवाली 2024 को 31 अक्तूबर या 01 नवंबर, दोनों में से किसी भी दिन मनाया जा सकता है। तारीख को लेकर भ्रम इसलिए है क्योंकि इस वर्ष कार्तिक अमावस्या की तिथि दो दिन पड़ रही है — 31 अक्तूबर की दोपहर से शुरू होकर 01 नवंबर की शाम तक।
प्र2: इस वर्ष दिवाली की तारीख को लेकर भ्रम क्यों है?
उ: इस साल कार्तिक अमावस्या दो दिन पड़ने के कारण दिवाली की तारीख को लेकर भ्रम है। सामान्यतः दिवाली कार्तिक अमावस्या के दिन मनाई जाती है, लेकिन इस बार यह तिथि 31 अक्तूबर और 01 नवंबर दोनों दिन पड़ रही है।
प्र3: हिंदू धर्म में दिवाली की तारीख कैसे तय की जाती है?
उ: दिवाली कार्तिक अमावस्या के दिन मनाई जाती है, जिसे वैदिक पंचांग के अनुसार तय किया जाता है। इस दिन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल और मध्य रात्रि के निशीथ काल में लक्ष्मी पूजन करने का विशेष महत्व होता है।
प्र4: दिवाली उदया तिथि पर मनानी चाहिए या प्रदोष काल में?
उ: हिंदू धर्म में व्रत-त्योहार आमतौर पर उदया तिथि (सूर्योदय के समय की तिथि) के अनुसार मनाए जाते हैं। कुछ लोग मानते हैं कि 01 नवंबर को अमावस्या की उदया तिथि होने के कारण दिवाली इस दिन मनाई जानी चाहिए। हालांकि, कई ज्योतिषी 31 अक्तूबर को प्रदोष काल और अमावस्या के दौरान दिवाली मनाने की सलाह देते हैं।
प्र5: वैदिक शास्त्र दिवाली पर लक्ष्मी पूजन के लिए क्या कहते हैं?
उ: वैदिक शास्त्रों के अनुसार, लक्ष्मी पूजन हमेशा अमावस्या की तिथि पर प्रदोष काल और निशीथ काल में करना चाहिए। इसलिए, ज्यादातर ज्योतिषियों का मानना है कि 31 अक्तूबर की रात को लक्ष्मी पूजन करना सबसे शुभ रहेगा।
प्र6: अमावस्या कब शुरू और समाप्त होगी 2024 में?
उ: 2024 में कार्तिक अमावस्या 31 अक्तूबर को दोपहर 3:12 बजे शुरू होगी और 01 नवंबर की शाम 6:16 बजे समाप्त होगी।
प्र7: 31 अक्तूबर 2024 को लक्ष्मी पूजन के शुभ मुहूर्त क्या हैं?
उ: 31 अक्तूबर को लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए पहला शुभ मुहूर्त प्रदोष काल में मिलेगा:
- प्रदोष काल: शाम 5:36 से रात 8:11 तक
- वृषभ लग्न (दिल्ली समय): शाम 6:25 से रात 8:20 तक
गृहस्थ लोग 6:25 से 7:13 के बीच लक्ष्मी पूजन कर सकते हैं, जो सबसे शुभ समय माना गया है।
प्र8: तांत्रिक साधना के लिए लक्ष्मी पूजन का सबसे अच्छा समय क्या है?
उ: तंत्र-मंत्र साधना के लिए निशीथ काल सबसे लाभकारी माना जाता है। 31 अक्तूबर को निशीथ काल रात 11:39 से 12:31 तक रहेगा।
प्र9: वृषभ लग्न और प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन का महत्व क्या है?
उ: ऐसा माना जाता है कि मां लक्ष्मी का प्रादुर्भाव प्रदोष काल में हुआ था। वृषभ लग्न में पूजन करने से धन-समृद्धि स्थिर रहती है। 31 अक्तूबर को वृषभ लग्न और प्रदोष काल एक साथ आ रहे हैं, इसलिए यह समय लक्ष्मी पूजन के लिए सर्वोत्तम है।
प्र10: 2024 में दिवाली मनाने के लिए अंतिम सुझाव क्या है?
उ: वैदिक पंचांग और ज्यादातर ज्योतिषियों की सलाह के अनुसार, दिवाली 31 अक्तूबर 2024 को मनानी चाहिए। लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे शुभ समय शाम 6:25 से 7:13 के बीच वृषभ लग्न और प्रदोष काल के दौरान रहेगा।

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